सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (SAMPURNA HINDI VYAKARAN) सीरिज के द्वारा आपको हिंदी व्याकरण की संपूर्ण जानकारी देने प्रयास है। सम्पूर्ण हिंदी व्याकरण (SAMPURNA HINDI VYAKARAN) सीरिज के माध्यम से हिंदी व्याकरण के सभी पाठों के जानकारी और हिंदी व्याकरण MCQ आपके लिए उपलव्ध कराया गया है I जो आपके लिए उपयोगी साबित होगा और आपके हिंदी व्याकरण का ज्ञान को एक नए स्तर पार ले जायेगा I
समास का अर्थ है-संक्षेपीकरण।
दो या दो से अधिक शब्दों को संक्षिप्त करके नया शब्द बनाने की प्रक्रिया देने की विधि समास कहलाती है।
समास की प्रक्रिया के बाद जो नया शब्द बनता है उसे सामासिक पद या समस्त पद कहते हैं।
समस्त पद को फिर से पहले जैसी स्थिति में लाने की प्रक्रिया समास-विग्रह कहलाती है।
विद्या के लिए आलय (घर) का समस्त पद विद्यालय और
विद्यालय का समास विग्रह विद्या के लिए आलय (घर)
विश्राम के लिए गृह का समस्त पद: विश्राम गृह
समस्त पद में दो पद होते हैं – पूर्वपद और उत्तर पद ऊपर के उदाहरण मे विश्राम पूर्वपद और गृह उत्तर पद है l
समास के 6 भेद होते हैं।
जब पूर्व पद और उत्तर पद से मिलकर एक नया शब्द बनता है उसे समस्त पद कहते हैं समस्त पद को सामानिक शब्द भी कहते हैं।
वह समास जिसमें उत्तर पद प्रधानता होती है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। तत्पुरुष समास में पहला पद विशेषण तथा दूसरा पद विशेष्य होता है।
| समस्त पद | समास-विग्रह |
|---|---|
| देशभक्त | देश का भक्त |
| पाठशाला | पाठ के लिए शाला |
| राजद्रोह | राजा का विद्रोह |
| राजपुत्र | राजा का पुत्र |
| देवदास | देव का दास |
| सूर्योदय | सूर्य का उदय |
| राजकुमार | राजा का कुमार |
| ग्रामवासी | ग्राम का वासी |
| शरणागत | शरण मे अगत |
| कर्मवीर | कर्म का वीर |
| सर्वोत्तम | सर्व मे उत्तम |
पहचान- पूर्व और उत्तर पद के बीच का, की,को,मे, से का प्रयोग
वह समास जिसके प्रथम पद पर विशेषण होती है उसे कर्मधारय समास कहते हैं। अर्थात जिन दो पदों के बीच ‘उपमेय- उपमान’ और ‘विशेषण- विशेष्य’ में संबंध हो उसे कर्मधारय समास कहते हैं
| समस्त पद | समास-विग्रह |
|---|---|
| महापुरुष | जो महान है पुरुष |
| नीलाकाश | नीला है जो आकाश |
| सज्जन | सत्य है जो ज़न |
| बहुमूल्य | बहुत है जो मुल्य में |
| पितांबर | पीला है जिसका अम्बर |
| चंद्रमुखी | चंद्र के समान मुख |
| दीर्घायु | दीर्घ है जिसका आयु |
| देवऋषि | जो देव है जो ऋषि है |
| महाऋषि | महान है जो ऋषि |
| महात्मा | महान है जो आत्मा |
वह समास जहां पर कोई भी पर प्रधान ना हो लेकिन समस्त पद अर्थ विषय की ओर संकेत करता हो वह समास बहुव्रीहि समास कहते हैं । बहुव्रीहि समास में दो शब्द मिलकर तीसरे नया अर्थ बनाते हैं |
बहुव्रीहि समास के उदाहरण
| समस्त पद | अर्थ |
|---|---|
| लंकेश | रावण |
| भूतनाथ | महादेव |
| गजानन | गणेश |
| निशाचर | राक्षस |
| नीलकंठ | महादेव |
| दिनकर | सूर्य |
| युधिष्ठिर | ज्येष्ठ |
| त्रिवेणी | प्रयाग |
वह समास जहां पर पूर्व पद और प्रधान पद दोनों समान होते हैं जिसके पहले पद में संख्या होती है उसे दिगु समास कहते हैं।
द्विगु समास के उदाहरण
वह समास जिसके समस्त पद प्रधान हो और उसमें या, और, आदि, अथवा चिन्ह का लोप होता है अर्थात जिसके दो भाग/खण्ड सामान हो उस द्वंद समास द्वंद समास किसे कहते है।
द्वंद समास के उदाहरण
| समस्त पद | समास-विग्रह |
|---|---|
| देश-विदेश | देश और विदेश |
| राधेश्याम | राधा और श्याम |
| चाय-पानी | चाय या पानी |
| जल-वायु | जल और वायु |
| फल-फूल | फुल और फुल |
| काम-काज | काम और काज |
| लाभ-हानि | लाभ और हानी |
| माता-पिता | माता और पिता |
| आर-पार | आर या पार |
| सुख-दुख | सुख और दुख |
| ऊंच-नीच | ऊंच और नीच |
| दाल-रोटी | दाल और रोटी |
वह समास जिसका पूर्व पद प्रधान होता है समास का पहले ही पद में अव्यय हो तथा समस्त पद अव्यय बन जाते है उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
अव्ययीभाव समास के उदाहरण-
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